कविता: “उषा”

Govind Pundir
1 Min Read
खबर को सुनें

प्रात पुष्प था बहुत खिला हुआ जैसे

लोहित आसमान का सूरज
पृथ्वी पर उतर रहा हो
[नदी सागर की यात्रा में
नयी सुबह है ]
बहुत धुआँ उठ रहा है उधर
कि जैसे जंगल जल रहा हो
कागज़ पर या समय के श्यामपट पर
लिख दी हो किसी ने
कुम्हलाई कली की करुणा
रूह की रोशनाई से
और देह
दर्द का गेह मालू हो रही है
गौर रेह रो रही है
रेत…
फ़सलें झुमती हैं रेगिस्तान में उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है!
गोलेन्द्र पटेल

Share This Article
Follow:
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
error: Content is protected !!