रक्षा बंधन का पर्व निराला हैं

Govind Pundir
1 Min Read
खबर को सुनें

रक्षा बंधन का पर्व निराला हैं, बहनों का प्यारा, त्योहार हमारा है।

रिश्तों को जोडें, दिल कभी न तोडे । दूरियों को मिटाता, हर साल है आता।।
अपनेपन का अहसास कराता, एकाकीपन को दूर भगाता ।

रक्षा बंधन का पर्व निरालाहैं, बहनों का प्यारा ,त्योहार हमारा है।।
हर दूरी को, यह कम कर जाता।दूर शहर से बहनों को हैं बुलाता।

हंसी खुशी, पल पल है बिताता, बच्चों को भी खूब है भाता।
रक्षा बंधन का पर्व निरालाहैं, बहनों का प्यारा, त्योहार हमारा है।।
पकवानों का स्वाद बढाता, जब मिलकर सारा परिवार है खाता।

आंखों में देकर खुशी के आंसू, फुर से है यह फिर उड जाता।।

रक्षा बंधन का पर्व निरालाहैं , बहनों का प्यारा त्योहार हमाराहै ।।
अगले साल आने की खुशी में, मन के सारे गम है भुलाता।

कडुवाहट को दिल से हटाकर ,मीठा मीठा अहसास कराता ।।

मायके आने का सेतु बन जाता, पूरा वर्ष पल मे कट जाता।
मां, पापा से मेल कराता, भाई -भाभी से उपहार दिलाता।स्नेह का धागा और मजबूत हो जाता।।

रक्षा बंधन का पर्व निराला हैं ,बहनों का प्यारा त्योहार हमाराहै ।।
* डा.शशि बाला वर्मा राजकीय महाविद्यालय पोखरी क्वीली टिहरी गढवाल

Share This Article
Follow:
*** संक्षिप्त परिचय / बायोडाटा *** नाम: गोविन्द सिंह पुण्डीर संपादक: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल टिहरी। उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार। पत्रकारिता अनुभव: सन 1978 से सतत सक्रिय पत्रकारिता। विशेषता: जनसमस्याओं, सामाजिक सरोकारों, संस्कृति एवं विकास संबंधी मुद्दों पर गहन लेखन और रिपोर्टिंग। योगदान: चार दशकों से अधिक समय से प्रिंट व सोशल मीडिया में निरंतर लेखन एवं संपादन वर्तमान कार्य: गढ़ निनाद न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करना।
error: Content is protected !!