सम्पादकीय: और अमर हो गए …अमर ‘सिंह’

सम्पादकीय: और अमर हो गए …अमर ‘सिंह’

गोविन्द पुण्डीर

गढ़ निनाद न्यूज़* 01अगस्त 2020

नई दिल्ली: किसी समय उत्तरप्रदेश की राजनीति के मजबूत स्तम्भ माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता व राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने 64 बसन्त पार करने के बाद लम्बी बीमारी के चलते शनिवार को दुनिया से अलविदा कह दिया।

‘अमर’ सिंह कभी सपा के  दिग्गज नेताओं में सुमार थे, इसी मार्च महीने में उन्होंने अपनी किडनी की बीमारी का ईलाज सिंगापुर के बड़े अस्पताल में सर्जरी कर करवाया था। 

उनके निधन पर महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शोक जताया। रक्षा मंत्री ने तो अपने ट्वीट में लिखा, ”वरिष्ठ नेता एवं सांसद श्री अमर सिंह के निधन के समाचार से दुःख की अनुभूति हुई है।सार्वजनिक जीवन के दौरान उनकी सभी दलों में मित्रता थी। स्वभाव से विनोदी और हमेशा ऊर्जावान रहने वाले अमर सिंहजी को ईश्वर अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।”

“और जब अमर सिंह ने करोड़ों की संपत्ति RSS को दान कर दी”

जी हां। राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने अपने आखिरी दिनों में कई अच्छे काम किए हैं। बता दें कि कुछ साल पहले ही अमर सिंह ने आजमगढ़ स्थित अपनी पैतृक संपत्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्था सेवा भारती संस्थान को दान कर दी थी। उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता की याद में उनकी संपत्ति सेवा भारती के नाम पर किया था। जब से उनके पिता की मौत हुई थी, तभी से उनका यह घर खाली रहता था। दान की गई संपत्ति की कीमत करीब 15 करोड़ बताई जा रही है। 

पिछले करीब छह महीने से सिंगापुर में इलाज करवा रहे अमर सिंह की मार्च में निधन की अफवाह उड़ी थी, जिस पर उन्होंने जवाब देते हुए वीडियो रिलीज किया था और कहा था कि ‘टाइगर अभी जिंदा है।’ वीडियो जारी कर अपने चिर परिचित अंदाज में अमर सिंह ने कहा था, ‘सिंगापुर से मैं अमर सिंह बोल रहा हूं। मैं बीमार हूं, त्रस्त हूं लेकिन संत्रस्त (डरा) नहीं हूं। हिम्मत बाकी है, जोश बाकी है, होश भी बाकी है। हमारे शुभचिंतक और मित्रों ने ये अफवाह बहुत तेजी से फैलाई कि मुझे यमराज ने अपने पास बुला लिया है। यह बिल्कुल भी सच नहीं है। मेरा इलाज चल रहा है।’ 

आइए, जानते हैं कुछ खास बातें

अमर सिंह का जन्म 27 जनवरी 1956 को हुआ था। वह संसद के उपरी सदन राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं। 6 जनवरी 2010 को, इन्होंने समाजवादी पार्टी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था , इसके बाद पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 2 फ़रवरी 2010 को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

वर्ष 2011 में इनका कुछ समय न्यायिक हिरासत में भी बीता। अन्ततः इन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया और घोषणा करते हुए कहा- “मैं अपनी पत्नी और अपने परिवार को अधिक समय देना चाहता हूँ। अतः चुनावों की अन्तिम तिथि १३ मई के बाद, मैं राजनीति से सन्यास ले लुँगा।” वर्ष 2016 में इनकी समाजवादी पार्टी में पुनः वापसी हुई और राज्य सभा के लिए चुने गये। फ़िलहाल ये समाजवादी से अलग होकर नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में आए दिन बयान देते रहे और अखिलेश यादव को नमाज़वादी भी घोषित कर दिया।