सीमांत किसानों को तत्काल राहत पहुंचाए सरकार- किशोर उपाध्याय

सीमांत किसानों को तत्काल राहत पहुंचाए सरकार- किशोर उपाध्याय

गढ़ निनाद न्यूज़* 29 सितम्बर 2020

नई टिहरी। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस के प्रणेता किशोर उपाध्याय ने सूखे के कारण तबाह हो चुके प्रदेश के सीमांत किसानों को तुरन्त राहत पहुँचाने हेतु मुख्यमंत्री और कृषिमंत्री को पत्र लिखा है।उपाध्याय ने कहा कि सरकारी वसूलियाँ तुरन्त स्थगित की जायँ, सूखाग्रस्त क्षेत्र के हर किसान परिवार को दस हजार रूपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाय।

उन्होंने सरकार से बैंक ऋण माफ़ किये जाने, बिजली-पानी के बिल वापस लेने के साथ ही राज्य में वनाधिकार कांग्रेस के एजेण्डे को लागू करते हुए जंगलों पर पुश्तैनी और कस्टमरी हक़-हकूक और अधिकार बहाल कर उनका आकलन कर क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।

उपाध्याय ने कहा कि “मैंने अभी प्रदेश के विभिन्न भागों का भ्रमण किया है और COVID-19 के दौर में दिये गये सरकारी निर्देशों के पालन करते हुये गरीब सीमान्त किसानों की दुर्दशा का प्रत्यक्षदर्शी हूँ।

किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है, कोरोना की बीमारी के कारण मजबूरी में बाहर गये कमाऊ पूत वापस अपने घर आ गये हैं और बेरोज़गारी का दंश झेल रहे हैं, अवसादग्रस्त हो रहे हैं या यों भी कह सकते हैं कि परिवार पर बोझ बनते जा रहे हैं । वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर अतिवृष्टि ने किसानों को जन और धन की हानि पहुँचाई है।

कहा कि इस समय पर्वतीय क्षेत्र का अधिकांश भाग सूखे की मार झेल रहा है।आप तो जानते ही हैं, पहाड़ी क्षेत्र की खेती-किसानी बारिश पर निर्भर है।पर्याप्त पानी न बरसने के कारण पहाड़ी क्षेत्र का काश्तकार भुखमरी की कगार पर है।

टिहरी बांध के कारण आश्चर्यजनक परिवर्तन टिहरी-उत्तरकाशी के बांध प्रभावित क्षेत्र में आ गये हैं और जहाँ यह अनुमान था कि बांध में पानी भर जाने के बाद आद्रता बढ़ेगी और पर्याप्त बारिश होगी, ठीक उल्टा हो रहा है, बारिश नहीं हो रही है। पूरा टिहरी ज़िला सूखे की चपेट में हैं। जाखणीधार, चम्बा, प्रतापनगर, थौलधार, कीर्तिनगर, देवप्रयाग आदि विकासखण्ड भयंकर रूप से सूखे की चपेट में हैं।

उपाध्याय ने मुख्यमंत्री और कृषिमंत्री से अतिशीघ्र इन गरीब काश्तकारों की सरकार सुध लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री जी का पूरा विधान सभा क्षेत्र सूखे से बूरी तरह से प्रभावित है। मेरा सुझाव है कि सभी सरकारी वसूलियाँ तुरन्त स्थगित की जायँ, सूखाग्रस्त क्षेत्र के प्रत्येक किसान परिवार को प्रतिमाह दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाय। 

कहा कि वनाधिकार कांग्रेस के निम्न एजेण्डे को तुरन्त लागू किया जाय। इसके तहत उत्तराखंडियों को Forest Dwellers (अरण्यजन) मानते हुये उनके पुश्तैनी वनाधिकार और हक़ हक़ूक़ बहाल किये जाँय, परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार स्थाई नौकरी दी जाय और केंद्र सरकार की सेवाओं में आरक्षण दिया जाय,प्रतिमाह एक गैस सिलेंडर, बिजली और पानी निशुल्क दिया जाय, जड़ी-बूटियों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार हो, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवायें निशुल्क हों, एक यूनिट आवास बनाने हेतु लकड़ी, बजरी व पत्थर निशुल्क दिया जाय, जंगली जानवरों द्वारा जन हानि पर 25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति व परिवार के एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी दी जाय, फसल के नुक़सान पर प्रतिनाली रु 5000/- क्षतिपूर्ति दी जाय आदि।

Similar Posts: