काश, इन साजिशों का होता पर्दाफाश

काश, इन साजिशों का होता पर्दाफाश
विक्रम बिष्ट

विक्रम बिष्ट*

गढ़ निनाद न्यूज़* 12 अक्टूबर 2020।

नई टिहरी। 2 अक्टूबर की इस बर्बर घटना को लेकर दिल्ली पुलिस उपायुक्त का एक पत्र उन दिनों चर्चा में रहा था। उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के नेता दिवाकर भट्ट और शिवानंद खुल्वे को लिखे पत्र में तब पुलिस उपायुक्त दीपचंद ने कहा था कि विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार भाजपा सांसद बीसी खंडूरी ने उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र के सभी पूर्व सैनिकों से दिल्ली रैली में बाबर्दी शामिल होने की अपील की है। यह भी कि उनमें से बहुत अपने साथ शस्त्र भी ला सकते हैं। करीब बीस हजार भूतपूर्व सैनिकों को रैली के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जाहिर है 30 सितंबर 94 का यह पत्र खासतौर पर जनरल खंडूरी के आलोचकों को बड़ा अवसर दे रहा था। सांसद खंडूरी ने प्रधानमंत्री को 10 अक्टूबर को पत्र लिखा। उन्होंने अनुरोध किया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दे कि दिल्ली में उत्तराखंड रैली से संबंधित एक उपायुक्त के पत्र और उसके बाद के घटनाक्रम को लेकर आरोप वापस लें तथा मुझसे क्षमा मांगे। उपायुक्त के खिलाफ कार्रवाई करें।

10 दिन तक उत्तर की प्रतीक्षा करने के बाद भाजपा संसदीय दल के मुख्य सचेतक बीसी खंडूरी ने अपना यह पत्र प्रेस को जारी किया। उन्होंने पत्र में लिखा था कि दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा मुझे बदनाम करने के लिए एक षड्यंत्र किया गया। जिसके तहत उपायुक्त दीपचंद द्वारा एक पत्र लिखा गया। जिसमें मुझसे संबंधित बिंदु मूलतः गलत है। इस पत्र के परिणाम स्वरूप मेरे विरुद्ध समाचार पत्रों में बड़े स्तर पर आरोप लगे। इससे मेरी प्रतिष्ठा पर आघात हुआ।

उन्होंने लिखा कि 5 अक्टूबर को ही पुलिस आयुक्त श्री कौशल से जांच करवाने को लेकर बात की थी। पुलिस आयुक्त ने अगले दिन जानकारी देने का वायदा किया था । लेकिन उसके बाद अनुपलब्ध बने हुए हैं।

पत्रकार सम्मेलन में भाजपा सांसद ने कहा था कि अब वह स्वंय संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कानूनी कार्रवाई करेंगे, जिसमें मानहानि का दावा भी हो सकता है। 

आगे क्या कार्रवाई हुई जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन पुलिस उपायुक्त के पत्र पर उचित कार्रवाई होती तो एक-दो अक्टूबर के साथ एक-दो सितंबर के खटीमा,मसूरी हत्याकांड के पीछे की साजिशों के खुलासे में कुछ मदद मिलती।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस उपायुक्त के इस पत्र में यह भी लिखा गया था कि विश्वसनीय श्रोतों से प्राप्त एक अन्य जानकारी से ने यह संकेत दिया है कि छात्रों की आड़ में 100 युवकों को उत्तराखंड के नेताओं के एक वर्ग द्वारा इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि वह अपने साथ पत्थर लाएं जिससे सभा व रैली में विघ्न डाला जा सके। कौन थे उत्तराखंड के ये नेता? क्या इसका पता कभी चलेगा?