सफलता हेतु आत्म चिन्तन करना जरूरी -डा. ध्यानी

सफलता हेतु आत्म चिन्तन करना जरूरी -डा. ध्यानी

गढ़ निनाद न्यूज़* 17अक्टूबर 2020

नई टिहरी। श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्व विद्यालय के कुलपति डा.पी.पी. ध्यानी ने कहा कि सफलता के लिए आत्म चिंतन करना बहुत जरूरी है। डा. ध्यानी ने यह बात एचएनबी गढ़वाल विश्व विद्यालय के स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में ’’स्वामी रामतीर्थ के 114वें निर्वाण दिवस’’ के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि के रूप में कही। 

डा. ध्यानी ने स्वामी रामतीर्थ के व्यक्तिव व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके द्वारा किस तरह से पूरी दुनिया में भारतीय दर्शन, भारतीय संस्कृति और वेदों को आचरण में लाने की विद्याओं का प्रचार-प्रसार किया गया। उन्होने स्वामी रामतीर्थ के गढ़वाल भ्रमण के बारे में तथा टिहरी को उनकी तपो भूमि बनने के बारे में भी विस्तृत रूप से बताया गया। डा.ध्यानी ने यह भी बताया कि उनके एक उद्वरण/ कोट (फनवजम) ने उन्हे कैसे कार्य द्वारा सफलता प्राप्त करने हेतु, प्रोत्साहित किया। 

डा. ध्यानी ने कहा कि सफलता प्राप्ति के लिये सबसे पहले हर व्यक्ति को प्रत्येक दिन अपने द्वारा किये गये कार्याे का रात्रि विश्राम से पहलेे आत्म चिंतन करना चाहिए कि आज उन्होने क्या-क्या कार्य किये, क्या वे उनसे संतुष्ट हैं? क्या उन्होने अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन किया आदि। आत्म चिंतन करने से मनुष्य को नयी दिशा मिलती है और नयी रूचि का विकास होता है, शरीर में उत्साह भी बढता है और सकारात्मक उर्जा का प्रवाह भी और फिर मनुष्य में दृढ़ इच्छा शक्ति का विकास होता है। 

इस अवसर पर डा. ध्यानी द्वारा एस.आर.टी. परिसर के निदेशक एवं शिक्षकों को यह सुझाव भी दिया गया कि उन्हे स्वामी रामतीर्थ जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को और चिरस्थाई बनाने के लिये उनके जीवन दर्शन को पाठ्यक्रमों में शामिल करना चाहिए और उनके जीवन के विभिन्न आयामो को शोध हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए। हर साल  विश्वविद्यालय परिसर में ’’स्वामी रामतीर्थ व्याख्यान’’ की शुरूआत करनी चाहिए।

कार्यक्रम का आयोजन स्वामी रामतीर्थ फाउंडेशन तथा एसआरटी परिसर, हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर परिसर के निदेशक प्रो. ए.ए. बौडाई, प्रो. एमएमएस नेगी, डा. के.सी. पेटवाल, डा. प्रेम बहादुर, प्रो. सुबोध कुमार, प्रो. डी.के. शर्मा, डा. लाखीराम डंगवाल, डा.आर.बी.गोदियाल और ठाकुर भवानी प्रताप सिंह आदि उपस्थिति रहे।

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