पर्यटन: विश्व भर के सैलानियों का प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा निजमुला घाटी का दुर्मीताल

पर्यटन: विश्व भर के सैलानियों का प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा निजमुला घाटी का दुर्मीताल

गोविन्द पुण्डीर

गढ़ निनाद * 19 सितम्बर 2020

नई टिहरी। सीमांत जनपद चमोली में बिरही से लगभग 18 किमी दूर निजमुला घाटी में प्राकृतिक रूप से बेहद सुन्दर नयनाभिराम दुर्मीताल स्थित था। जहाँ पर लोग ताल की सुन्दरता का लुत्फ उठाने जाया करते थे। यह पांच मील लंबा, एक मील चैड़ा और तीन सौ फुट गहरा एक विशाल ताल था। ताल के ऊपरी हिस्से में त्रिशूल पर्वत की शाखा कुंवारी पर्वत से निकलने वाली बिरही समेत अन्य छोटी-बड़ी चार नदियों के पानी से ताल में पानी भरता रहता था। इस ताल के एक कोने पर गौणा गांव और दूसरे कोने पर दुर्मी गांव बसा है। इसलिए इसे गौणा ताल या दुर्मी ताल कहा जाता था।

कभी 15 करोड़ घन मीटर पानी था इसमें 

बता दें बिरही से ही इस घाटी को सड़क जाती है। इसलिए बाहर से आने वाले इसे बिरही ताल भी कहते थे। इसमें करीब 15 करोड़ घन मीटर पानी था। लेकिन 20 जुलाई 1970 को नंदा घुंघटी पर्वत पर भारी बारिश और बादल फटने से पर्वत से आए भारी मलवे के कारण दुर्मी ताल टूट गया था। गौणा ताल ने उस दिन बहुत बड़े प्रलय को अपनी गहराई में समाकर उसका छोटा-सा अंश ही बाहर फेंका था। ताल टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी बिरही की संकरी घाटी से होते हुए चमोली, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, ऋषिकेश और हरिद्वार की ओर बढा और अलकनंदा घाटी में खेती और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ था।

कभी नौकाएं चलती थी इस ताल में

प्राकृतिक रूप से निर्मित यह ताल पहले देशी विदेशी पर्यटकों के खासे आकर्षण का केंद्र रहा है। अंग्रेजों के जमाने में इस ताल में नौकाएं चलती थी। इसके चलते स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता था। आज भी नौकाओं के अवशेष यहाॅ माॅजूद है। 

दुर्मीताल के पुनर्जीवित करने की मांग 

क्षेत्रवासी लंबे समय से दुर्मीताल के पुनर्जीवित करने की मांग करते आ रहे है। अब इस तालाब को पुनर्जीवित कर बहुउदेशीय तालाब के रूप में विकसित करने की मांग जोर पकडने लगी है। 

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

दुर्मी या गौणा ताल से नौकायन, मत्स्य पालन, विद्युत उत्पादन और साहसिक पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही अपितु यह प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाने में सहायक होगा। तालाब में भरे मलवे को निकाल कर फिर से इस प्राकृतिक तालाब को बनाने की पहल शुरू हो गई है। घाटी के लोग इस ताल को पुनः विकसित कर इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने की मांग करते आ रहे है। 

आकर्षण के केंद्र रहे हैं ये ताल

सप्तकुंड ट्रैक से लेकर लार्ड कर्जन रोड के अलावा यहाँ पर्यटन की असीमित संभावनाएं है। ताल के पुनर्जीवित होने से एक बार फिर से ये घाटी पर्यटन का केन्द्र बनेगी। बिरही घाटी में गौणा ताल, सप्तताल, तड़ाग ताल, लार्ड कर्जन रोड, पीपलकोटी- किरूली- पंछूला-गौणा- गौणाडांडा- रामणी ट्रैक पर्यटकों का खासे आकर्षकण का केद्र रहा है। इस ताल के अस्तित्व में आने से यह पूरी दुनिया के सैलानियों का प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा और घाटी की खोई रौनक भी वापस लौटेगी।

सीएम रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट है दुर्मी-गौणा ताल

बता दें कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत दुर्मी- गौणा ताल को पुर्नजीवित करने की व्यक्तिगत इच्छा जाहिर कर चुके है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया था कि जल्द ही दुर्मीताल को पुर्नजीवित करने से पहले यहाॅ पर तत्काल जो काम हो सकते है, उनको शुरू कराया जाएगा।

डीएम ने किया घाटी का दौरा

विगत दिनों जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने इस घाटी का व्यापक दौरा किया और कहा कि इसमें ट्रैक मार्ग का सौन्दर्यीकरण, म्यूजियम निर्माण और साइट डेवलपमेंट के तहत कैपिंग साईट, व्यू प्वाइंट बनाने का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। तथा भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के बाद प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। 

दुर्मी-गौणा ताल एक सुन्दर पर्यटन स्थल

जिलाधिकारी का भी मानना है कि दुर्मी-गौणा ताल एक सुन्दर पर्यटन स्थल बन सकता है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाऐं है। इस क्षेत्र के आसपास लाॅर्ड कर्जन ट्रैक, क्वारीपास,सप्तकुंड, तडाग ताल जुड़े है। यहाॅ से नन्दा घुघंटी एवं त्रिशूल पर्वत का सुदंर नजारा भी दिखता है और दुर्मी-गौणा ताल के अस्तित्व में आने से इस क्षेत्र को भरपूर लाभ मिलेगा। बहरहाल दुर्मी-गौणा ताल के अस्तित्व में आने में कितना समय लगेगा यह अभी भविष्य के गर्त में है। 

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