जल संचय जीवन संचय विषय पर कार्यशाला

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 नई टिहरी (27 अगस्त) –  जनपद में संचालित एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तत्वाधान में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए ‘‘जल संचय-जीवन संचय‘‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला जिलाधिकारी डाॅ0वी0 षणमुगम की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिसमें विकासखण्ड चम्बा एवं जौनपुर क्षेत्र की लगभग 250 की संख्या में उपस्थित महिलाओं को वर्षा जल संरक्षण के महत्व तथा क्षेत्रान्तर्गत स्थित जल स्रोतों को जीवित रखने में ग्रामीण क्या भूमिका निभा सकते हैं, आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी साथ ही जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई, कृषि, उद्यान, एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना, उत्तराखण्ड विकेन्द्रीकृत जलागम विकास परियोजना फेज-2 के अन्तर्गत जनपद में किये जा रहे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यो की जानकारी भी सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा महिलाओं को दी गयी।

इस अवसर पर जिलाधिकारी डाॅ0 वी0 षणमुगम ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षा जल का संरक्षण करना हमारे लिए बेहद आवश्यक है क्योंकि भूमिगत जल का स्तर निरंतर कम होता जा रहा है वहीं पारंपरिक जल स्रोत भी सूख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम जल संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर अभी नहीं चेते तो भविष्य में इसके दुष्परिणाम भुगतने होंगे। नदियां सूखेगीं, वन समाप्त होगें तथा पहाड़ों से पलायन होगा। जिलाधिकारी ने महिलाओं का आहवान किया कि जमीन और जंगल से पहाड़ की महिलाएं सर्वाधिक जुड़ी है वे ही वर्षा जल के संरक्षण एवं परंपरागत जल स्रोतों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होने कहा कि महिलाएं अपने क्षेत्रान्तर्गत चाल-खाल आदि का वर्षा काल प्रारम्भ होने के समय साफ-सफाई कर वर्षा जल का संचय करें, घर की छतों के पानी का भी संचय करें, हैण्डपम्प के समीप साॅकपिट बनाकर जल का संरक्षण करें ताकि भूमिगत जल का स्तर बना रहे। नदियों, पारम्पिरिक स्रोतों के समीप वृक्षा रोपण करें ताकि जल स्रोत जीवित रहें।


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