बच्चा चोरी के शोर की अफवाहों में निर्दोषों पर हिंसा

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पूरन सिंह कार्की (लेखक व पत्रकार)

बच्चा चोरी करने वाले गिरोहों के बारे में समाचार पत्रों और. सोशल मीडिया पर तेजी से खबरें वायरल हो रही हैं जिनमें पकड़े गए लोग या तो विक्षिप्त या अपने घरों से दूर दूसरे कश्बों में आकर रोजीरोटी कमाने के लिए बाहर निकले लोग थे। प्रश्न यह उठता है कि सिर्फ ‘बच्चा चोर, शोर सुनते ही विवेकहीन भीड़ इकट्ठा हो कर  विना सोचे समझे  किसी अनजान व्यक्ति पर हिंसात्मक तरीक़े से क्यों टूट पड़ती है। भीडध यह नहीं देखती, सोचती है कि इसी प्रकार किसी अफवाह के चलते शक के तहत उनके परिवार का सदस्य भी तो किसी जगह अफवाहों के चलते हिंसा का शिकार बन सकता है।ऐसी घटनाओं को हिंसात्मक अंजाम देने  में सिर्फ विवेकहीन और बेवजह अशांति फैलाने वाली भीड़ का हाथ होता है।जो मामले को समझने, बेकसूर व कसूरवार को पहचानने, सुनने की बजाय उस पर पागलों की तरह टूट पड़ते हैं।

ऐसी घटनाओं में अब तक कई लोग अपनी जान तक गवां चुके हैं मानवजीवन जिसे बचाने के लिए हम ऐड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं वे असामाजिक तत्वों के शिकार हो रहे हैं।निर्दोषों का जीवन लेने का किसी को भी अधिकार नहीं है ।इन अफवाहों और अफवाहजनित हिंसा से बचने का एक ही उपाय है कि बच्चाचोरी के नाम पर अफवाह फैलाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।हत्या में शामिल भीड़ के खिलाफ एफ.आइ.आर.दर्ज कर उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाये यदि इस तरह की घटनाओं को समय रहते ना रोका गया तो इससे अराजकता का माहौल पैदा होगा।जनता को जागरूक होकर भीड़ का हिस्सा बनने से दूर रहना होगा।हो सके तो निर्दोषों  के बचाव में आगे आयें और ऐसे  व्यक्तियों को पुलिस को सौंपने की कोशिश करें।संदिग्ध व्यक्ति पर बिना पूरी जांच पड़ताल के हिंसक बन कर उतर जाना अपराध की श्रेणी में आता है।ऐसे में अपराधी प्रवृत्ति के लोग अवसर का लाभ उठाकर अपराध करने से नहीं चूकते।मनोविज्ञान कहता है कि विवेकहीन और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग जब  भीड़ से जुड़ते हैं तो वे भीड़ की ही भाषा बोलने लगते हैं।निर्दोष व्यक्ति की कोई सुनता ही नहीं है।इसलिए विवेक से काम लेकर भीड़ का हिस्सा कतई नहीं बनें।ऐसा करने से अवसर का लाभ उठाकर अशांति फैलाने वालों के हौसले पस्त हो जायेंगे और पुलिस को अपनी कार्रवाई करने में आसानी होगी।बहरहाल, ये समाज विरोधी तत्व समाज का शांत वातावरण भंग करना चाहते हैं और हिंसा को उकसाकर निर्दोषों की पिटाई व हत्या कर रहे हैं।

अब समय आ गया है कानून अपने हाथ में लेकर ऐसे अमानवीय व घिनौने कार्यों को अंजाम देने वालों के साथ पुलिस सख्ती से पेश आये।सोशल मीडिया और भीड़  इकट्ठा करनेवालों पर निगरानी रखना बहुत जरुरी है।जनता किसी भी बातों में आकर भीड़ का हिस्सा बनने की बजाय अपनी बुद्धि और विवेक से काम ले और हो सके तो शरारती तत्वों की सूचना तुरंत पुलिस और मीडिया तक पहुंचायें। हर हालत में निर्दोषों और.बेगुनाहों को हिंसा का शिकार होने से बचाने में सहयोग दें।

पूरन सिंह कार्की (लेखक व पत्रकार)


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