भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष

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भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष

31 अक्टूबर

आज 31 अक्टूबर को भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी है। वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।

19 नवंबर 1917 को जवाहरलाल नेहरू जी के घर एक दूरदर्शी, ज़िद्दी और कुशल राजनीतिकार बेटी ने जन्म लिया। वह कोई और नहीं इंदिरा थीं। पिता जवाहर लाल नेहरू आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वालों में शामिल थे। वही दौर रहा, जब 1919 में उनका परिवार बापू के सानिध्य में आया और इंदिरा ने पिता नेहरू से राजनीति का ककहरा सीखा। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही उन्हें भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल हुआ।

इंदिरा जी ने मात्र 11 साल की उम्र में ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए बच्चों की वानर सेना बनाई। 1938 में वह औपचारिक तौर पर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुईं और 1947 से 1964 तक अपने प्रधानमंत्री पिता नेहरू के साथ उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। ऐसा भी कहा जाता था कि वह उस वक्त प्रधानमंत्री नेहरू की निजी सचिव की तरह काम करती थीं, हालांकि इसका कोई आधिकारिक ब्यौरा नहीं मिलता।

इंदिरा को राजनीति विरासत में मिली थी और ऐसे में सियासी उतार-चढ़ाव को वह बखूबी समझती थीं। यही वजह रही कि उनके सामने न सिर्फ देश, बल्कि विदेश के नेता भी उन्नीस नजर आने लगते थे। अत: पिता के निधन के बाद कांग्रेस पार्टी में इंदिरा गांधी का ग्राफ अचानक काफी ऊपर पहुंचा और लोग उनमें पार्टी एवं देश का नेता देखने लगे।

इंदिरा जी सबसे पहले लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं। शास्त्री जी के निधन के बाद 1966 में वह देश के सबसे शक्तिशाली पद ‘प्रधानमंत्री’  पर आसीन हुईं। एक समय ‘गूंगी गुडिया’ कही जाने वाली इंदिरा गांधी तत्कालीन राजघरानों के प्रिवी पर्स समाप्त कराने को लेकर उठे तमाम विवाद के बावजूद तत्संबंधी प्रस्ताव को पारित कराने में सफलता हासिल करने, बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने जैसा साहसिक फैसला लेने और पृथक बांग्लादेश के गठन और उसके साथ मैत्री और सहयोग संधि करने में सफल होने के बाद बहुत तेजी से भारतीय राजनीति के आकाश पर छा गईं ।आपातकाल लागू करने का फैसला करने से पहले भारतीय राजनीति एक ध्रुवीय सी हो गई थी इंदिरा की ऐतिहासिक कामयाबियों के चलते उस समय देश में ‘इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा’ का नारा जोर-शोर से गूंजने लगा।

इंदिरा का एक सपना था गरीबी मुक्त भारत । आज भी वह सपना साकार नहीं हो पाया है। सभी लोगों को भारत से गरीबी को मिटाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, ताकि उनके सपने को हकीकत में तब्दील किया जा सके। 

इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को होगी कि जनता पार्टी के शासनकाल में श्रीमती इंदिरा गांधी पूरी तरह आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख हो गई थीं। उन दिनों सुबह-सवेरे के नित्यकर्मों से विमुक्त होने के बाद वे लगभग एक घंटे तक योगाभ्यास करती थीं और तत्पश्चात मा आनंदमयी के उपदेशों का मनन। सुबह दस बजे से लेकर बारह बजे के मध्य वे आगंतुक दर्शनार्थियों से मिलती थीं। श्रीमद् भगवत गीता में भी इस दरम्यान उनकी पर्याप्त रुचि हो गई थी। समय-समय पर वे उसका भी पारायण करती थीं।

इंदिरा की राजनीतिक छवि को आपातकाल की वजह से गहरा धक्का लगा। इसी का नतीजा रहा कि 1977 में देश की जनता ने उन्हें नकार दिया, हालांकि कुछ वर्षों बाद ही फिर से सत्ता में उनकी वापसी हुई। उनके लिए 1980 का दशक खालिस्तानी आतंकवाद के रूप में बड़ी चुनौती लेकर आया। ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को लेकर उन्हें कई तरह की राजनीतिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। राजनीति की नब्ज को समझने वाली इंदिरा मौत कीआहट को तनिक भी भांप नहीं सकीं और 31 अक्टूबर, 1984 को उनकी सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षाकर्मियों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उन्हें गोली मार दी। दिल्ली के एम्स ले जाते समय उनका निधन हो गया।

उनकी मौत के बाद की राजनीतिक विरासत को पहले उनके बड़े पुत्र राजीव गांधी ने आगे बढ़ाया और अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी उससे जुड़े हैं। आज देश और विदेश में इंदिरा के नाम से कई इमारतें, सड़कें, पुल, परियोजनाओं और पुरस्कारों के नाम जुड़े हैं। पुनः उस कुशल राजनीतिकार एवम अद्म्य साहस की धनी पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 इंदिरा गांधी जी को उनकी पुण्य तिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि।


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