केजरीवाल सरकार ने की उत्तराखंड की संस्कृति बचाने की पहल

केजरीवाल सरकार ने की उत्तराखंड की संस्कृति बचाने की पहल
उत्तराखंड की संस्कृति बचाने की पहल
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केजरीवाल सरकार ने की उत्तराखंड की संस्कृति बचाने की पहल

नई टिहरी * गोविन्द पुण्डीर

जिस परिकल्पना को लेकर हमने अपना अलग उत्तराखंड राज्य मांगा था, वह आज किसी भी दृष्टि से पूरी होती नजर नहीं आ रही। पहाड़ की पीड़ा थी, कि उत्तर प्रदेश के पंच सितारा होटलों में बैठकर पहाड़ की योजनाओं का खाका तैयार किया जाता है; जिससे यहां का विकास नहीं हो पाता। हमारी बोली, भाषा, संस्कृति सब अलग है, पहाड़ी क्षेत्र है। शायद उत्तराखंड बनेगा तो हमारी बोली, भाषा और संस्कृति को तवज्जो मिलेगी। हमें रोज़गार मिलेगा, आम जनता का भला होगा।

रणवांकुरों के लहू से उत्तराखंड तो बना। लेकिन विकास, रोज़गार, अपनी बोली-भाषा, संस्कृति के मुद्दे आज भी धरे के धरे रह गये। अपनी बोली-भाषा, संस्कृति  के लिये जो पहल हमने शुरू करनी थी वह हम तो कर नहीं पाए, लेकिन हां आज दिल्ली की केजरीवाल सरकार हमसे दो कदम आगे निकल गई। जिसने बाक़ायदा उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बचाने-सहेजने के लिए एक समिति का गठन कर दिया। कितनी विडम्बना है कि जो प्रयास उत्तराखंड की सरकार को करने चाहिये थे, उसकी शुरुआत दिल्ली में हो रही है।

ज्ञातव्य है कि  दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उत्तराखंडी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस समिति का काम होगा गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना। समिति का वाइस चेयरमैन उत्तराखंड के लोकप्रिय गायक, जनकवि और गीतकार हीरा सिंह राणा को बनाया गया है।

दिल्ली सरकार द्वारा गठित यह देश की पहली अकादमी है, जो उत्तराखंड से सम्बद्ध भाषा साहित्य संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी। एकेडमी उत्तराखंड की कला और संस्कृति को बढ़ावा देगी। यही नहीं एकेडमी को जल्द ही एक ऑफिस भी मुहैया कराया जाएगा, जिसमें सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कला, संस्कृति और भाषा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध शहर है। यहां पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोग बसे हैं। इनमें एक बड़ा तबका उत्तराखंड के लोगों का है। उत्तराखंड के बहुत सारे लोग दिल्ली में निवास करते हैं। हम उन लोगों को ऐसा प्लेटफॉर्म मुहैया कराना चाहते हैं, जहां वो अपनी कला-संस्कृति से रूबरू हो सकें। इसके साथ ही दिल्ली के लोग भी उत्तराखंड की संस्कृति को करीब से जान सकेंगे, समझ सकेंगे।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि एकेडमी के वाइस चेयरमैन जाने माने लोक गायक हीरा सिंह राणा है, एकेडमी को स्थापित करने के लिए वो हमारे साथ आए हैं। यही नहीं दिल्ली सरकार गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वालों को अवॉर्ड भी देगी। संस्कृति कर्मियों को प्रोत्साहन देने के उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। एकेडमी के जरिए लैंग्वेज कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। दिल्ली सरकार एकेडमी के जरिए गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। कुल मिलाकर दिल्ली में एक सराहनीय प्रयास हो रहा हैउम्मीद है जल्द ही दूसरे राज्यों में भी हमें इसी तरह की कोशिशें होती नजर आएंगी। राजनीति-कार इस  फैसले को जिस भी दृष्टि से देखें ,

लेकिन पहल तो अच्छी है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। अच्छा होगा कि हमारी सरकार भी इस दिशा में आगे कदम उठाएगी।


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