जिला अस्पताल बौराड़ी में अल्ट्रासाउंड सीज़ होने से जनता में रोष और मरीज परेशान

जिला अस्पताल बौराड़ी में अल्ट्रासाउंड सीज़ होने से जनता में रोष और मरीज परेशान
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नवंबर 15, 2019

 जिला अस्पताल बौराड़ी में अल्ट्रासाउंड सीज़ होने से जनता में रोष, मरीज परेशान। केंद्रीय निरीक्षक टीम सवालों के घेरे में।

जिला अस्पताल बौराड़ी में केंद्रीय निरीक्षक टीम द्वारा छापा मारकर अल्ट्रासाउंड को सीज करना किसी के गले नहीं उतर रहा। निरीक्षक टीम का कहना है कि अल्ट्रासाउंड को कुछ दस्तावेजों में कमी को देखते हुए सीज़ किया गया है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आने वाले मरीज बिना अल्ट्रासाउंड कराएं ही वापिस जा रहे हैं। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी – भागीरथी जंगपांगी की माने तो विगत शाम को केंद्रीय निरीक्षक टीम ने अस्पताल में छापा मारा तो अल्ट्रासाउंड में कुछ दस्तावेजों में कमी दिखी जिसके बाद अल्ट्रासाउंड को सीज कर दिया गया।

सूत्रों की माने तो अस्पताल में मौजूद पुराने दस्तावेजों के आधार पर अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि मसीह अस्पताल चम्बा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवप्रयाग औऱ बेलेश्वर में स्वास्थ्य विभाग ने कौन से ऐसे नये दस्तावेज उपलब्ध करा रखे हैं जो मानकों पर खरे उतरते हैं। वे दस्तावेज जिला चिकित्सालय बौराड़ी को क्यों नहीं दिए गये जिनके आधार पर अल्ट्रासाउंड किया जाना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं है तो केवल जिला अस्पताल बौराड़ी में ही अल्ट्रासाउंड सीज़ क्यों किया गया है। क्यों नहीं चम्बा, बेलेश्वर और देवप्रयाग के अल्ट्रासाउंड सीज़ किये गए। इस कार्रवाई से निरीक्षक टीम पर उंगली उठना लाज़मी है।

केंद्रीय निरीक्षक टीम की यह कार्रवाई समझ से परे

टीम ने यह  कतई नही सोचा कि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से लोग यहां अल्ट्रासाउंड कराने आते हैं और एकाएक इस सुविधा को बाधित करना कितना न्यायसंगत है? लोग दूर-दराज से यहां आकर निराश और परेशान होकर वापस लौट रहे हैं। अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर केवल कागज चस्पा करने मात्र से काम चलने वाला नहीं है ।

मुख्य चिकित्साधिकारी को चाहिए कि वह जनहित में तत्काल अल्ट्रासाउंड खोलने के निर्देश दें। रही बात दस्तावेज़ों को पूरा करने की तो इसके लिए कार्रवाई गतिमान रहनी चाहिए। केवल कुछ दस्तावेजों में कमी को लेकर अल्ट्रासाउंड ही बन्द कर दिया जाए यह जनता  के साथ घोर अन्याय है। विभाग की केंद्रीय निरीक्षक जांच टीम की इस कार्रवाई से जहां जनता में रोष है, वहीं मरीजों को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है।


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