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पुराना दरबार ट्रस्ट की ओर से प्रताप नगर स्थित रानी महल में विश्व धरोहर दिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी आयोजित

पुराना दरबार ट्रस्ट की ओर से प्रताप नगर स्थित रानी महल में विश्व धरोहर दिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी आयोजित
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रानी महल का  संवर्धन, संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी-ठाकुर भवानी प्रताप 

टिहरी गढ़वाल 17 अप्रैल। पुराना दरबार ट्रस्ट की ओर से प्रताप नगर के रानी महल में विश्व धरोहर दिवस की पूर्व संध्या पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में क्षेत्र के विद्वान, साहित्यकार, इतिहासकार, रंग कर्मी, बुद्धिजीवियों, और छात्र-छात्राएं शामिल हुए। उन्होंने आगामी योजना पर विचार विमर्श किया और सुझाव दिए, जो पुराना दरबार ट्रस्ट को उपलब्ध किए गए। इन सुझावों के आधार पर एक कार्य योजना की तैयारी की जाएगी। 

पुराना दरबार ट्रस्ट के ट्रस्टी ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार ने गढ़ निनाद को जानकारी देते हुए बताया कि प्रताप नगर तत्कालीन टिहरी रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित हुआ। इसमें प्रशासनिक भवन एवं ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण किया गया है साथ ही महाराज द्वारा विशेष अवसर पर यहां पूजा अर्चना भी की जाती थी। नवरात्र की नवमी की पूजा भी पारंपरिक रूप से रानी महल के इस परिसर में की जाती आ रही है। इस भवन का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व है जिसका संरक्षण आने वाली पीढ़ियां के हित में किया जाना आवश्यक है। 

उन्होंने कहा कि  रानी महल समाज की मूल्यवान संपत्ति है,जो प्राचीन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का हिस्सा है। इसका संरक्षण समाज की गौरव और संबंधों को स्थापित करता है, और पर्यटन को बढ़ावा देता है। इसे पुरातात्विक स्थल घोषित करने की आवश्यकता है और कानूनों को ऐतिहासिक इमारतों की देखभाल के लिए संशोधित किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में इस भवन को संरक्षण, जीर्णोद्धार, की आवश्यकता है , ताकि यह समग्र पर्यटन और राज्य के लिए उत्पादक राजस्व के अलावा लोगों के लिए शिक्षा और कल्याण का केंद्र बन सके ।

रानी महल का निर्माण महाराजा प्रताप शाह की मृत्यु के बाद उनकी धर्मपत्नी महारानी गुलेरिया ने करवाया। उनके बड़े पुत्र महाराजा कीर्ति शाह और छोटे पुत्र राजकुमार विचित्र शाह ने इसे विकसित किया। 

इस भवन का प्रारंभिक निर्माण 1871 से 1887 के बीच टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह की मृत्यु के पश्चात उनकी धर्मपत्नी महारानी गुलेरिया ने निर्माण पूर्ण करवाया। यह टिहरी गढ़वाल की रीजेंट भी रही। 1886 से 1892 तक इन्होंने टिहरी गढ़वाल रियासत पर शासन किया। महारानी गुलेरिया के बड़े पुत्र महाराजा कीर्ति शाह और छोटे पुत्र राजकुमार विचित्र शाह ने ग्रीष्मकालीन राजधानी को और विकसित किया था। आज विश्व धरोहर दिवस पर यह संकल्प लेते हुए हम अपनी धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना होगा। आज विश्व धरोहर दिवस की पूर्व संध्या पर हमें अपनी धरोहर को संरक्षित रखने का संकल्प लेना चाहिए।

इस मौके पर श्री हरीश नेगी उर्फ हैरी नेगी, राहुल भर्ती बीडीसी मेंबर छोल गांव, पवन, प्रवीण कुमार, नरेश कुमार, सुभाष गौतम, पारस नाथ सिंह, भारत भूषण सिंह, निशा रावत आदि मौजूद रहे।


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Govind Pundir

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