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आपका बैंक में जमा पैसा कितना सुरक्षित है?

आपका बैंक में जमा पैसा कितना सुरक्षित है?
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डॉ0 राजीव राणा, अर्थशास्त्री
07 दिसंबर 2019

हाल ही में आरबीआई द्वारा सूचना जारी कर लोगों को यह बताया गया की किसी बैंक के बंद या फेल हो जाने पर उसमें जमा पूंजी कितनी सुरक्षित होगी? यह प्रश्न ऐसे समय में बहुत ज्यादा जरुरी हो गया है जब आम जनता छोटे बैंकिंग और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के डूबने से लगातार सहमी हुई है! उदाहरण के तौर पर हाल ही में महाराष्ट्र का पीएमसी बैंक है, जहाँ इस बैंक के फेल होने से हज़ारों लोगों के बचत-जमा धन डूबने का खतरा बना हुआ है! लोगो को अपनी जमा बचत का थोड़ा पैसा मिलना भी लगभग नामुमकिन लगा रहा है. साथ ही यह खबर बहुत तेजी से सोशल मीडिया में भी फैली। 

आरबीआई ने अपनी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) इकाई के हवाले से बताया कि यदि कोई बैंक फेल होता है तो उसमे जमा धनराशि का लगभग जनता को 1 लाख तक का बीमा होता है. अतः किसी बैंक के फेल होने की स्थिति में खाताधारक को 1 लाख तक की जमा राशि भारत सरकार यानी आरबीआई द्वारा भुगतान किया जायेगा।  

डीआईसीजीसी के बारे में 

डिपॉज़िट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसकी स्थापना 15 जुलाई 1978 को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन अधिनियम, 1961 के तहत किया गया था इसका उद्देश्य बैंक में जमा धन का बीमा प्रदान करना और क्रेडिट सुविधाओं की गारंटी देने हेतु किया गया। DICGC बैंक के सभी जमा खाते जैसे कि बचत, निश्चित, चालू, आवर्ती जमा को शामिल करता है। बैंक में प्रत्येक जमा खाता पर स्कीम की सीमा 1 लाख रुपये ही है।

यह बीमा राशि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन जो की आरबीआई की एक कंपनी है द्वारा भुगतान किया जाता है तथा ये बीमा विभिन्न प्रकार की जमाओ पर बैंक द्वारा प्रीमयम के भुगतान पर दिया जाता है। यहाँ पर हमारे लिया यह जानना जरुरी है कि आखिरकार ये डीआईसीजीसी (DICGC) कौन है? डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन एक्ट, 1961 में उल्लेख किया गया है कि जमा राशि के बीमा की गारंटी और क्रेडिट सुविधाओं की गारंटी  हेतु अस्तित्व में आया है।

यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियंत्रण में है, तथा इस निगम का प्रबंधन आरबीआई निदेशक मंडल के अधीन है, और आरबीआई के एक उप-गवर्नर इसके अध्यक्ष हैं। डीआईसीजीसी (DICGC) अधिनियम के अंतर्गत, बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा, (i) एक अधिकारी (सामान्य रूप से RBI के कार्यकारी निदेशक का पद) होगा, (ii) केंद्र सरकार का एक अधिकारी, (iii) पांच निदेशक नामित RBI के परामर्श से केंद्र सरकार, जिनमें से तीन वाणिज्यिक बैंकिंग, बीमा, वाणिज्य, उद्योग या वित्त का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्ति होते हैं तथा निगम का प्रधान कार्यालय मुंबई में है।

बीमा का उद्देश्य 

जमा बीमा दुनिया भर में व्यापक रूप से अपनाया जाता है लगभग सभी देश इसको बैंकिंग प्रणाली  का एक अभिन्न अंग मानते है। विशेष रूप से वित्तीय सुरक्षा नेट बैंकिंग प्रणाली के लिए प्रदान की जाती है। वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान कई देशों ने नई जमा बीमा योजनाएं शुरू की है तथा इसके दायरे को बढ़ाया, जिससे जनता के विश्वास को बहाल करने और संभावित बैंकिंग फेल को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाये गये। 

जमा बीमा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक स्वीकृत और व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली नीति है बैंकिंग क्षेत्र। यह लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सर्वोत्तम अभ्यास का हिस्सा रहा है विकासशील देशों को सिफ़ारिशें। वैश्विक वित्तीय संकट ने इस ओर ध्यान बढ़ा दिया है जमा बीमा, कई देशों के साथ या तो मौजूदा या मौजूदा रूप से बढ़ रहा है जमा बीमा कवरेज। संकट ने दोनों की ताकत के साथ-साथ कुछ को भी उजागर किया है।

भारतीय जमा बीमाराशि दुनिया में सबसे कम 

 विस्तरित आँकड़े बताते है की भारत की जमा बीमा योजना में बैंक जमाकर्ताओं की संख्या 70 प्रतिशत है। भारत में बीमित धनराशि लगभग १ लाख रुपया तक है। हलाकि ब्रिक्स में भारत की सहकर्मी अर्थव्यवस्थाओं के बीच, बीमा के तहत कवर जमा का हिस्सा अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार अगर हम भारतीय रुपया में इसके तुलना करे तो यह दर्शाता है की जहा भारतीय जमा बीमा लगभग रुपया 1,07,487 लाख  होती है वही रूस में यही धनराशि भारतीय रुपया में 13,69,259 लाख रुपया होगी और वही यह धनराशि ब्राज़ील में 45,63,605 लाख रुपया होगी तथा कनाडा में यह धनराशि 51,50,156 लाख रुपया है एवं इंग्लैंड में यही धनराशि 79,22,106 लाख रुपया है। जो यह दर्शाता है की भारतीय नागरिकों की बचत के लिए अभी भी काफी संशोधन/रिफ़ॉर्म की जरुरत है।

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