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हिंसा और लोकतंत्र साथ-साथ नहीं चल सकते: उपराष्ट्रपति

हिंसा और लोकतंत्र साथ-साथ नहीं चल सकते: उपराष्ट्रपति
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गढ़ निनाद समाचार
नई दिल्ली, 30 दिसम्बर 2019
हैदराबाद में संयुक्‍त आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ. चन्ना रेड्डी के जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंसा और लोकतंत्र एक साथ नहीं चल सकते हैं और उन्‍होंने लोगों को सावधान किया कि वे गलत खबरों के इस युग में भावनाओं में न बहें। कहा कि जहां तक ​​सीएए, एनआरसी और एनपीआर का संबंध है, देश के लोगों को एक प्रबुद्ध, सार्थक और रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए और जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं आना चाहिए।

शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करें विरोध

यह कहते हुए कि असंतोष या असहमति को रचनात्मक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। सभी प्रकार की हिंसा से दूरी बनाए रखें। उन्होंने संसद और विधानसभाओं की गरिमा बनाए रखने और बहस के मानकों को ऊपर उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत हमले नहीं किए जाने चाहिए, जबकि नीतियों की आलोचना की जा सकती है।

डॉ. चन्ना रेड्डी को श्रद्धांजलि की अर्पित

डॉ. चन्ना रेड्डी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उन्होंने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री एक जमीनी स्‍तर के और जन नेता थे, जिन्होंने आम लोगों की स्थिति में सुधार लाने के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने कहा कि यह तथ्य कि वह कई उच्च पदों पर आसीन रहे, उनके प्रशासनिक कौशल और नेतृत्व के गुणों का प्रमाण है।

डॉ. चन्ना रेड्डी सामाजिक न्याय के पुरोधा

उन्होंने यह भी कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री सामाजिक न्याय के भी पुरोधा थे और उन्‍होंने 1980 में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण की शुरुआत की थी। लोकतांत्रिक नींव के सुदृढ़ीकरण में दृढ़ विश्वास रखते हुए उन्‍होंने स्थानीय निकायों के लिए मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 साल कर दी।

टी.हनुमंथा राव को मरणोपरांत डॉ. एम. चन्ना रेड्डी राष्ट्रीय पुरस्कार

उपराष्ट्रपति ने प्रख्यात सिंचाई विशेषज्ञ स्वर्गीय श्री टी.हनुमंथा राव को मरणोपरांत सतत विकास के लिए डॉ. एम. चन्ना रेड्डी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार जल संभर विकास के लिए फोर वाटर कॉन्सेप्ट (एफडब्ल्यूसी) के उनके क्रांतिकारी नवोन्‍मेषण के सम्‍मान के रूप में दिया जाता है।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय, तमिलनाडु के माननीय पूर्व राज्यपाल डॉ. के. रोसैया और अन्य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित थे।


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