बुधू: लौट के बुधू घर को आया

बुधू:  लौट के बुधू घर को आया

जब से सुना है कि दुष्ट चीन हमारी सीमा में घुसपैठ करने की हरकत कर रहा है तो बुधू की भुजाएं फड़कने लगीं। सभी आम भारतीयों की तरह।

यूं उच्च कोटि की देश भक्ति के ब्रांड वाले तो अपने-अपने नफे नुकसान की ही सोचते हैं , हम जाने ना जाने अपनी नफा नुकसान की सोचते हैं हम जाने न मानें। टीवी के परदे पर लरजती गुजरती पर कटी देश भक्ति तो खून खौला ही देती है। जिस भारतीय का खून न खोला वो बेकार जवानी है। उनकी टीआरपी और हमारा ब्लड प्रेशर तीव्र गति से बढ़ता है। 

आपका बुधू भला ऐसे अवसर पर चुप कैसे बैठा रह सकता है। नारायण युगीन स्वनिर्मित सुपर डुपर उड़न खटोले से उड़ चला हिमालय की ओर।  इरादा पक्का कर लिया की सीधे उधर घुस कर जीवंत रिपोर्टिंग करूंगा।  हो सके तो एक दो चीनी पत्रकारों को पकड़ लाऊंगा । तब बुधू महानतम जुझारू खोजी पत्रकार की परम् पदवी हासिल करने वाला भारतीय पहला पत्रकार बन जाएगा।

अभी हिमालय से ऊंचा उड़ ही रहा था कि सामने से आता तेज अंधड़ उड़न खटोले से टकरा गया। उड़न खटोला तेजी से नीचे की ओर पलटी खा रहा था तभी थम गया और ऊपर की ओर और ज्यादा तेज गति से उड़ने लगा। नीचे देखा तो हनुमान जी ने एक हाथ से 

उड़न खटोला थम हुआ था।  

चंद मिनटों में उड़न खटोला इंद्रसभा जैसे रंगीन विशाल हाल में पटक दिया गया।उस गोलाकार हाल में बड़े, ऊंचे, नीचे, छोटे, नीचे रंग-बिरंगे सिंहासनों पर रंग बिरंगे लोग बैठे थे, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए। 

दूसरी ओर अति उच्च रंगीन आसन पर एक श्वेत पुरुष बैठा था। एक सिहासन खाली था। चारों तरफ हथियारों की प्रदर्शनी लगी हुई थी। तमाम अन्य चीजों की भी।

ऊंचे सिहासन वाले आपस में बात कर रहे थे। कभी उच्च क्रुद्ध स्वर में कभी निम्न मुस्कुराते, फुसफुसाते हुए। दोनों तरफ तालियां बजती। मुठ्ठियां तनती।

हाल के बीचो-बीच नाच गान भी चल रहा था। ओ-ले-ओ-ले । खानम तू-तू-ऊ-ऊ-।

मेरी कुर्सी जोर से हिली। भूकंप। नींद खुली तो बुधिया एक हाथ में नाश्ते की थाली लिए झँजोड़ रही थी। धत तेरे की महान खोजी देशभक्त पत्रकार बनने का मौका भी हाथ से गया।

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