जलते जंगल, नष्ट होती बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा : भरत गिरी गोसाई

जलते जंगल, नष्ट होती बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा : भरत गिरी गोसाई

गढ़ निनाद समाचार।

नई टिहरी, 8  अप्रैल 2021। उत्तराखंड की भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 71% ‌‌(38000 वर्ग किलोमीटर) भूभाग जंगल है। वर्तमान समय में उत्तराखंड के 40% जंगलों में भयंकर आग फैली है, जिससे वायु प्रदूषण निरंतर बढ़ता जा रहा है। साथ ही साथ असंख्य जीव-जंतु, पेड़-पौधे भी नष्ट हो रहे हैं। उत्तराखंड सरकार के अनुसार नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, टिहरी व पौड़ी जिले आग से सर्वाधिक प्रभावित है।

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग का प्रभाव: वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस साल जनवरी से अभी तक (6 अप्रैल 2021) उत्तराखंड में जंगलों की आग की  989 घटनाएं घटी है, जिस कारण लगभग 1292 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गए है। इन जंगलों की आग के कारण अब तक 6 मानव मृत्यु तथा 4 मवेशी मृत्यु की सूचना दी गई है। साथ ही साथ वनों मे पाये जाने वाले असंख्य जीव-जंतु तथा बहुमूल्य प्राकृतिक वन संपदा भी नष्ट हुए है। 2016 के बाद यह सबसे भीषण आग साबित हुई है। उत्तराखंड में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने में आग लगी है। वर्ष 2020 मे जंगल की आग की 170 घटनाएं तथा 172 हेक्टेयर भूमि क्षतिग्रस्त दर्ज की गई थी। 15 फरवरी से मई के अंत तक आमतौर पर उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाएं घटित होती है। इस अवधि को राज्य के वन विभाग ने “फायर सीजन” के रूप में करार दिया है।

जंगलों में लगने वाली आग के प्रमुख कारण: वन विभाग के अनुसार राज्य मे जंगलों मे लगने वाली आग के चार प्रमुख कारण है: स्थानीय लोगों द्वारा जानबूझकर लगाई गयी आग, लापरवाही, खेती से जुड़ी गतिविधियां एवं प्राकृतिक कारण।

जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास: उत्तराखंड सरकार ने जंगलों की उग्र आग पर काबू पाने के लिए 12000 वन कर्मियों  की तैनाती की घोषणा की है। लगभग 1300 फायर स्टेशनों की स्थापना भी की गई है। सरकार द्वारा एक हेल्पलाइन 1800 1804141 भी जारी की गई है, जो जंगलों में लगने वाली आग की सूचना देने तथा आवश्यक कार्रवाई हेतु सहायक सिद्ध होगी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड  के दोनो मंडलों के लिए एक एक मिग-17 हेलीकॉप्टर जंगलों की भीषण आग पर काबू पाने के लिए प्रदान की गई है, जो कि एक समय में 5000 लीटर पानी ले जाने में सक्षम है।

जंगलों में लगी आग पर नियंत्रण की विधियां:

पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ० अनिल प्रकाश जोशी के अनुसार सरकार को वन पंचायतों को वनों की रक्षा के लिए अधिकार तथा प्रोत्साहन देना चाहिए। जिससे जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही साथ जन जागरूकता, सरकार द्वारा कठोर कानून बनाकर अनिवार्य रूप से उसका पालन कराया जाना चाहिए।

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