चैत्र नवरात्र पर विशेष: ऐसे करें कलश स्थापना

चैत्र नवरात्र पर विशेष: ऐसे करें कलश स्थापना

गढ़ निनाद समाचार। 

नई टिहरी, 13 अप्रैल 2021। 

“या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमो नमः”

आज 13 अप्रैल से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। याने आज विक्रम संवत 2078 प्रतिपदा दिन मंगलवार चैत्र नवरात्र का पहला दिन है। आज माँ शैलपुत्री की पूजा का विधान है। माँ का यह स्वरूप सती पार्वती, दुर्गा, अर्पणा, गौरी, पर्वतवासिनी आदि नामों से प्रसिद्ध है।

 कलश स्थापना विधि

अब कलश स्थापना कैसे करें यह सवाल सबके मन मे रहटाक्स है। सही विधि क्या है। तो लीजिये जानते हैं कलश स्थापना की सही विधि। सबसे पहले मां भगवती की मूर्ति या तस्वीर के सामने मिट्टी के ऊपर कलश रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरुण देवता का आह्वान करें। कलश में सर्व औषधी और पंचरत्न डालें। कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते कलश में डालें। कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर इसके ऊपर एक दीपक प्रज्वलित करें। कलश में पंचपल्लव डालें इसके ऊपर लाल वस्त्र लपेटकर एक पानी वाला नारियल रखें। 

कलश के नीचे मिट्टी में जौ के दाने फैलाएं। देवी का ध्यान करें- 

“खड्गं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:, शंखं सन्दधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वांग भूषावृताम। नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकां, यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥

इसके बाद गणेश जी और सभी देवी-देवताओं की पूजा करें। अंत में भगवान शिव और ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मां भगवती की पूजा करके दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

नवरात्र में कलश स्थापित करने वाले को सबसे पहले पवित्र होने के मंत्र- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ हाथ में कुश और जल लेकर इस मंत्र को पढ़कर स्वयं को और पूजन सामग्रियों को पवित्र कर लेना चाहिए। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल, जल, पान, सिक्का और सुपारी लेकर दुर्गा पूजन का संकल्प करना चाहिए।

नवरात्रि के दिनों में माँ के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने का विधान है। 

“या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमो नमः”

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